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मंत्र विज्ञान
संक्षिप्त परिचय
मंत्र क्या हैं?
हम सभी बड़े असमंजस में रहते हैं कि ये मंत्र क्या है? हमने कई बार सुना भी है और पढ़ा भी है की मंत्रों के द्वारा मनुष्य तो क्या देवता को भी बस में किया जा सकता है यह तथ्य बड़ा ही आश्चर्य जनक लगता है। विश्व ब्राह्माण्ड की वह अदृश्य सट्टा वह अलौकिक शक्ति, जो ईश्वर, अल्लाह या वाहेगुरु, मौला भगत जिस नाम से भी जानते है, उसको देखने या समझने का एकमात्र साधन अध्यात्म ही है। अध्यात्म की तो बहुत सी शाखाएं हैं। किसी भी एक के माध्यम से हम लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं। अध्यात्म की ही एक ऐसी शाखा है — मंत्र । कभी-कभी हम ऐसा भी सोचते हैं की मंत्रों में ऐसी कौन सी शक्ति है। जिससे इतने अद्भुत चमत्कार हो जाते हैं, लेकिन मंत्रों की चर्चा तो हमारे कितने भी प्राचीन ग्रंथो में भरी पड़ी है।
विश्व का सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद माना जाता है। उसे मंत्रों का महाकोष कहा जाता है। ऋग्वेद के पश्चात कालांतर में सामवेद यजुर्वेद और अथर्ववेद नामक तीन और वेदों की रचना हुई। यह चारों ही वेद मंत्रों के महा सागर कहे जाते हैं। इन महासागरों को देखकर हमारे मन में सहज ही यह धारणा बनती है, कि मंत्रों की रचना वेदों से भी बहुत पहले हो चुकी है, वेदों के समय में तो मंत्रों का विकास चरमोत्कर्ष पर था। वेदों के बाद ही संहिता, उपनिषद, आरण्यक इत्यादि ग्रन्थों की रचना मिलती है। जिनकी पृष्ठभूमि मंत्रों के आधार पर बनी है।
मंत्रों में अनेक प्रकार की शक्तियां समाहित रहती है। यह मंत्र तो ब्राह्मण वर्ग के लिए जीवन जीविका और ज्ञान के प्रमुख अंग थे। हमारा भौतिक विज्ञान भी आज यांत्रिक माध्यम से वह कुछ नहीं कर पा रहा जो चमत्कारिक शक्तियाॅं मंत्रों के माध्यम से होती थी।
लेकिन इनके सही उपयोग की जानकारी न होने से हम इनका उचित लाभ नहीं उठा पाए। इनका उचित लाभ तो केवल बड़े-बड़े ओझा, भगत, तांत्रिक, अघोरी, ज्योतिषाचार्य ने ही उठाया है। हमारी साधारण जनता को तो कुछ मालूम ही नहीं, हम अपनी साधारण भाषा के द्वारा जनसाधारण को इसका परिचय करना चाहते हैं। ऐसा हमारा सोचना है। आजकल हमने बड़े-बड़े नेताओं, प्रधानमंत्री, मंत्री, उद्योगपतियों तक को इनका प्रयोग करवाते देखा है कि किस मुहूर्त में हमें वोटिंग पर्चा भरना चाहिए। कब कुर्सी पर बैठना चाहिए और कौन सा मुहूर्त उचित है। कितने ही लोग वर्षा इत्यादि के लिए भी इन मंत्रों का प्रयोग हवनो एवं षत्कर्मों के द्वारा करते देखे गए हैं।
मंत्र विद्या तो थोड़े बहुत रूपांतर के साथ पूरे विश्व में प्रचलित थी। इसकी अद्भुत और अचूक शक्ति को तो सभी संप्रदायों के विद्वान मानते थे। मनुष्य के अंतःकरण को स्थिर और सबल बनाने के लिए मंत्र शक्ति को ही अत्यधिक सक्षम पाया गया था।
आज भी विदेशों में प्रायः दक्षिणीपूर्वी एशियाई भूखंडों में जैसे जावा, वर्मा, थाईलैंड, सुमात्रा, चीन इत्यादि ऐसे देश है। जहां आज भी ब्रह्मविद्या के ऐसे विद्वान मौजूद है। जो आज भी ऐसा चमत्कार कर दिखाते हैं, जो मानवीय कल्पना के बहुत दूर है। आज भी विदेशों से बहुत से लोग शांति की खोज में आध्यात्मिक के लिए हमारे देश में आकर निवास करते हैं। हमारे देश भारत के कितने ही विद्वानों को आज भी दूसरे देश के लोग सादर आमंत्रित करते हैं।
आचार्य गणेश नाथ के संस्मरणों में तो ऐसी घटनाओं की भरमार भरी परी है।
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| आचार्य गणेश नाथ |
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